C.A.A & NRC: New way to Address THE PROTESTS

देश में चल रहे C.A.A के खिलाफ आंदोलन में भारत के लोगो को बड़ी कीमत चुकानी पर रही है। एक तरफ सरकार ने इन आंदोलनों के खिलाफ पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है वही देश की जनता और छात्र/छात्राए विश्वविधालय के जरिये इस कानून के विरोध में में अपनी आवाज़ उठा रही है। देश में तो कई जगह यह प्रदर्शन हिंसात्मक हो गया है तो कई जगह शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन हो रहा है तो कई जगहों पर शांतिपूर्ण आंदोलन में कुछ असामाजिक तत्व आकर आंदोलन की गरिमा को बिगाड़ रहे है। ज्यादातर स्थानों पर तो पुलिस भी हिंसक हो जाती है तो कई स्थानों पर पुलिस जनता से वादा करती हुई कहती है की उनकी आवाज़ (जनता की आवाज़) को सरकार तक पहुचायेगी। हलाकि इस तरह के वादे कई दूसरे राज्यों में भी पुलिस ने किया है परन्तु कुछ असामाजिक तत्वों की कारण औरआंदोलन हिंसक होने के कारण पुलिस बलो दवारा काफी बर्बरतापूर्ण तरीके से जनता पर लाठी चार्ज किया जा रहा है। सेक्शन 144 जैसी धराये/इंटरनेट बंद करना तो आम बात हो गयी है तथा हाल ही के इंटरनेट डेटा बंद होने की एक लिस्ट “एक्सेस नाव” कंपनी/संगठन के दवारा दिया गया है जिसमे यह बताया गया है की भारत पुरे विश्व में सबसे जयादा इंटरनेट बंद करने वाली देश बन गयी है। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में 154 बार इंटरनेट बंद किया गया है। जैसा की आप जानते है की किसी भी जगह पर इंटरनेट बंद की जरूरत क्यों पड़ती है। अतः वापिस मुद्दे पर आते है देश में चल रहे इस अलोकतांत्रिक कानून के खिलाफ में शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन करने के लिए विद्यार्थियों ने एक नया तरीका निकाला है।

C.A.A & NRC: New way to Address THE PROTESTS
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सभी विद्यार्थियों/आन्दोलनकारियो ने दिल्ली पुलिस को एक गुलाब का फूल देकर यह नारे लगाए की “दिल्ली पुलिस हमसे बात करो”.

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इसी दौरान एक लड़की पुलिस बलो को गुलाब का फूल दे रही है। उनके दूसरे हाथो में एक स्लोगन लिखा था की ”मेरे पिता सोच रहे है की में इतिहास पढ़ रही हूँ शायद उनको ये नहीं पता की में इतिहास बना रही हूँ” .
इनका(छात्रा) का नाम श्रेया प्रियम राय है, दिल्ली विश्वविद्यालय में यह M.A HISTORY(इतिहास)की पढ़ाई पूरी कर रही है,बिहार राज्य से है। इन्होने बताया की “मेने यह कभी भी नहीं सोचा था की मेरा यह फोटो(गुलाब देते हुए)जो जंतर मन्तर पर लिया गया था ,वह सोशल मीडिया पर इतना वायरल हो जायेगा और C.A.A के खिलाफ कर रहे आंदोलन का एक चेहरा बन जायेगा”. इनका मानना है की जब तक इस आंदोलन के लिए नए नए चेहरों का(फेमस लोगो)स्वागत हो रहा है वह इन मुद्दों के आलावा मुख्य मुद्दों पर धयान केंद्रित किया जाये। “मैं एक रेगुलर स्टूडेंट हु जो stand -up comedy से प्रभावित हूँ तथा जाहिर तौर पर में इस तरीके से वायरल नहीं होना चाहती थी “. हलाकि यह फोटो एक नॉन-रेगुलर स्टूडेंट के दवारा क्लिक की गयी था तथा कई बार इसे सोशल मीडिया पर शेयर किया गया और लोगो तो आशर्यचकित हो गए की पुलिस की इतनी बर्बरतापूर्ण तरीके के सलूख के बाबजूद बिना डरे समाज में एक प्रकार का मैसेज कौन तय कर रहा है यह काफी हिम्मत का भी काम है। जे. एन.यूँ ,दिल्ली विशवविधालय,जामिआ मिलिया इस्लामिआ तथा और भी कई संसथान है जो जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे।

Q मिस रॉय से पूछा गया की “ऐसा क्या कारण था की वह इस आंदोलन में आयी”
A उन्होंने जवाव दिया की “मेने अपने दोस्त से सुना की जामिआ में पुलिस ने अहिंसात्मक रूप से वह के स्टूडेंट्स को पीटा है। तब उन्होंने यह तय किया की वह पुलिस के इस सख्त कारवाही के खिलाफ आवाज़ उठयेंगी और एक गुलाब देने से अच्छा सन्देश पुलिस को क्या मिलेगा”. “मेने उन्हें गुलाब दिया क्युकी सभी जगह जैसे जवाहरलाल यूनिवर्सिटी,जामिआ मिलिया इस्लामिआ और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स काफी बर्बरतापूर्ण तरीके से पिटे जा रहे थे . मैं उन्हें बताना चाहती हू की स्टूडेंट्स कभी भी हिंसात्मक तरीका नहीं अपनाया बल्कि वह अपना आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से कर रहे है”.
मिस रॉय ने कहा की “मैं इस आंदोलन के लिए किसी भी संगठन से नहीं जुडी हूँ,मैं अकेले आयी हूँ तथा मेने यह गुलाब रास्ते में ख़रीदा और इसके पीछे उदेशय यह था की ‘अगर पुलिस इस आंदोलन में भी हिंसात्मक कार्यवाही करे तो मैं अपने बचाव में उन्हें यह फूल दे दूंगी’ “.
N.R.C के लेकर मिस रॉय ने बताया की यह हमारे देश के संविधान और सेकुलर के खिलाफ है।हमे अपनी नागरिकता साबित करनी होगी और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की आप कितने बड़े भारतीय है या कब से है। मिस रॉय से पूछ गया की उन्हें यह आईडिया कहाँ से मिला जिसके जवाब में उन्होंने मीडिया को बताया की मुझे यह आईडिया जवाहरलाल यूनिवर्सिटी में हुए प्रोटेस्ट में देखा था की सभी स्टूडेंट्स फूल देकर पुलिस से हिंसात्मक कार्यवाही करने का विरोध कर रहे थे।(यह बात करीब 2 से 3 साल पहले की है)

C.A.A & NRC: New way to Address THE PROTESTS
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अतः वैश्विक तौर पर देखा जय तो इतिहास में भी इस फूल वाले प्रोटेस्ट के तरीके को देखा गया है जैसे : अमेरिका बनाम वियतनाम प्रोटेस्ट में लोगो ने इस तरीके को अपनाया था। इस युद्ध को इतिहास में दूसरे इंडिया-चीन युद्ध के नाम से भी जाना जाता है। जिसमे अमेरिका ने वियतनाम,लाओस,कम्बोडिया से युद्ध की स्तिथि उत्पन्न की थी जो की 1 नवम्बर 1955 से 30 अप्रैल 1975 तक हुई थी।

हाल ही में उत्तर-प्रदेश के हुए नागरिकता संसोधन कानून के विरोध जो की अचानक ही हिंसात्मक रूप में बदल गया और इसमें सात लोग मारे गए। परन्तु नागरिकता कानून और भारतीय नागरिक रजिस्टर के खिलाफ आंदोलन देशभर में जारी है। वही पर होम-मिनिस्टर अपना बयान दे रहे है की इससे मुश्लिमों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं नहीं किया जाएगा। spokeperson का कहना है की कोई भी प्रमाण-पत्र जो जनम और जनम-स्थान से जुड़ी हो, वह काफी है नागरिकता साबित करने के लिए।
डी. जी पी का कहना है की किसी भी तरह की फायरिंग(गोली) नहीं हुए है

उत्तर प्रदेश के डिरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस ओ.पी सिंह का कहना है की पुलिस ने प्रदर्शनकारिओ के खिलाफ की भी गोली नहीं चलाई है। दो लोगो की बिजनौर में हत्या हो गयी है तथा एक की हत्या मेरठ,फिरोजाबाद,संभल,कानपूर में हुई है यह डेटा P.T.I ने दिया है। हलाकि देशभर में इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन चल रहे है पर सरकार इसके खिलाफ कुछ नहीं कर रही है सिवाए twitter पर अपनी रोटी सेकने के अलावा। देश में और भी कई समस्याए होने के बाबजूद भी सरकार नागरिकता कानून लायी और आगे एन.आर.सी लेन के फ़िराक में लगी हुई है। आज देशभर में प्रदर्शनकारिओ ने अपने आंदोलन को कई रूपों में जाहिर किया कई जगहों पर जब पुलिस इनपर लाठी चार्ज करने वाली थी तो आन्दोलनकारीओं ने राष्ट्रगान गया तो कई जगह पुलिस ने भी प्रदर्शनकारिओ के आंदोलन को हिंसक न होने के लिए साथ में मिलकर राष्ट्रगान गया। आज राजघाट पर देशभर से कई लोगो ने इस कानून के खिलाफ बड़ी संख्या में आकर प्रदर्शन किया। जब लोगो से पूछा गया की उनके आने के पीछे क्या मकसद है तो लोगो का कहना था की “सरकार ऐसे ही संविधान के मौलिकताओं में बदलाव नहीं कर सकती है”. सरकार को कोई हक़ नहीं है की वह धर्म के आधार पर लोगो को नागरिकता बाटे। लोगो का यह भी कहना है की “संविधान की जो रूह है ‘समानता’ उस पर हमला हो रहा है, ये जो सरकार है वह एक प्रकार से मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रही है,देश में इतने सारे मुद्दे है काम करने को लेकर परन्तु उन्हें कुछ भी काम नहीं करना है ” . अतः जैसा की आप जानते है समाज में हर तरह के लोग रहते है और वे हर तरह की विचारधारा को अपनाते है परन्तु अगर देश की जनता एक साथ आकर सिर्फ एक ही कानून का विरोध करे तो ऊचे कुर्सी वालो को समझाना चाहिए की देश की जनता कुछ कहना चाहती है और उन्हें(ऊचे कुर्सी वाले) इन विचारो पर दोबारा सोचने की जरुरत है। हलाकि देश में भीम सेना ने भी इस प्रोटेस्ट में भाग लिया है और इस कानून के खिलाफ आवाज़ उठायी है।

THANK YOU…

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