how does cryptocurrency works(beginner to expert)?

how does Cryptocurrency works(beginner to expert)?

what is a crypto-currency and how it works?

क्रिप्टोकरेंसी एक वर्तुल कर्रेंसी है जिसे पैसो के सुरक्षित लेनदेन के लिए प्रयोग में लाया गया था यह कर्रेंसी एक विकेन्द्रीकृत होती है। बिट कॉइन सबसे पहला क्रिप्टोग्राफी था जिसे 2009 में असिस्त्व में लाया गया और दूसरे शब्दो में इसे विकेन्द्रीकृत करेंसी भी कह सकते है। इस क्रिप्टोकरेंसी के चलन से दुनिया में वर्तुल मनी का प्रचलन भी ज्यादा हो गया और जबसे बिटकॉइन असिस्त्व में आया तब से 4000 से भी ज्यादा आलकॉइन(बिटकॉइन के दूसरे या कई प्रकार) बनाये गए थे।

क्रिप्टोकरेंसी की परिकल्पना किसके द्वारा की गयी ?

1983 में, एक अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक और क्रिप्टोग्राफर “””डेविड चम”” ने एक गुप्त क्रिप्टोग्राफी विधुतीय मुद्रा की कल्पना की और यह काम उन्होंने डिजिटल कैश के माध्यम से पूर्ण किया।

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क्रिप्टोग्राफी के कल्पना के बाद इसे कैसे बनाया जाए ?

क्रोप्टोग्रापञ के प्रारम्भिक चरणों में ऑनलाइन पेमेंट की जरूरत थी जिसे एक ऐसे सॉफ्टवेयर की आवश्यकता थी जो पैसो के लेनदेन को सुरक्षित रखे और पैसे निकलते समय एक गोपनीय नम्बर भेज दिया जाए । इस मुद्रा का कोई संगठन ना होने के कारण इसका पता लगाना नामुमकिन से है।
1996 में,नेशनल सेकुरिटी एजेंसी (संयुक्त राज्य अमेरिका) ने एक पेपर : हाऊ टू मेक मिंट, एक क्रिप्टोग्राफी पब्लिश किया जिसमे बताया की यह पहले “एम.ई.टी” मेलिंग और बाद में 1997 में इसे अमेरिकन लॉ रिव्यु में भी प्रकाशित किया गया था।

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1998 में, “वाई.दाई” ने “बी-मनी” नाम के कैश का विवरण दिया जिसका पता लगाना गुप्त था। इसके बाद ही ‘निक सजाबो’ ने बिटगोल्ड को असिस्त्व में लाया जो की बिटक्वाइन की ही तरह था। बिटगोल्ड में एक महवपूर्ण बात यही थी की इसको जॉइन करने की प्रक्रिया में पूरे सबूत और प्रमाण चाहिए थे जो इसको लोगो के लिए पूर्ण निष्पक्ष और दूसरे बिटकॉइन से अलग बनाते थे। सबसे पहले बिटकरेंसीय 2009 में एक नाम या एक ग्रुप “सतासी नाकामोटो” ने बनाया था।

यह एस.एच.ऐ-256 (एक क्रिप्टोग्राफी हेश फंग्शन है जिसे नेशनल सेकुरिटी एजेंसी के द्वारा बनाया गया था।) का प्रयोग करती है। 2009 में बिटकॉइन के आने के बाद से तो बहुत से प्रकार के वर्तुल करेंसी बाजार में आने लेगी। अप्रैल 2001 में, नेमकोइन भी अस्तित्व में आया इसके बाद अक्टूबर में लाइटकॉइन जो की पहला सक्सेसफुल क्रिप्टोकरेंसी था जिसका प्रयोग हेस फंग्शन की तरह होता है बजाय एस.एच्.ऐ-256 के। 6 अगस्त को यूनाईटेड किंगडम ने एक सरकारी संगठन को बनाने की घोषणा की और उन्हें निर्देश दिया की वे क्रिप्टोकरेंसी पर रिसर्च करे और देखे की ये यूनाइटेड किंगडम की अर्थव्यवस्था में किस प्रकार का बदलाव लाएंगे ।

एक विकेन्द्रीकृत क्रिप्टोकरेंसी का उत्पाद एक क्रिप्टोकरेंसी सिस्टम के द्वारा होता है जिसमें जवाबदेही नही होती है। परंतु एक केंद्रीकृत बैंकिग सिस्टम में या कोई भी बैंक में पैसों का उत्पादन प्रिंट के माध्यम से होता है और इन पैसों का हिसाब एक खातों में रखा जाता है। और यह सरकार के आदेश से प्रभावित होती है तो इसका निर्माण लिमिटिड ही होता है परंतु क्रिप्टोकरेंसी में किसी भी सरकारी हस्तक्षेप ना होने से इसमे दुबारा से नई करैंसी नही बनती है। क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते प्रभाव के कारण मई 2018 तक 1800 क्रिप्टोकरेंसी असिस्त्व में आ चुकी थी और क्रिप्टोकरेंसी के अन्दर,इसकी सुरक्षा और इसकी अखण्डता तथा खातों के बैलेंस एक परिपक्व पार्टियों के द्वारा की जाती थी। जिन्हें दूसरे शब्दो में माईनर कहते है जो इसमे टाइम टू टाइम इसमे हुए ट्रांजिक्शन को देखते रहते है।

क्रिप्टोकरेंसी कुछ मनको पर कार्य करती है :

1.ब्लॉकचैन:
क्रिप्टोकरेंसी जैसे पैसो की वैधता एक ब्लॉकचैन के द्वारा मुहैया करवाई जाती है।ब्लॉकचैन एक ऐसी उभरतीं हुई व्यवस्था है जिसे क्रिप्टिग्राफी के द्वारा प्रयोग करके सुरक्षित रखा जाता है। हर ब्लॉक एक हैश फंग्शन होता है जो पिछले ब्लॉक से जुड़ा होता है। ब्लॉकचैन के द्वारा बनाये गए डेटा में स्वाभिक रूप से कोइ बदलाव नही किया जा सकता है यह एक खुला सोर्स है जिसका रिकॉर्ड दोनो पार्टियों के बीच रखा जाता है। एक वितरित खाताधारकों के लिए ब्लॉकचैन पियर टू पीयर नेटवर्क के रूप में प्रयोग किया जाता है। जिसका कार्य नए ब्लॉकचैन बनाने में होता है।

2.समय समय के साथ मुद्रा का हिसाब (समयमुद्राकन्न):
क्रिप्टोकरेंसी बहुत से समयमुद्राकन्न का प्रयोग करती है जिसका मकसद ट्रांजिक्शन की वैधता ब्लॉकचैन के जरिये मापना होता है और वो भी बिना किसी तीसरी पार्टी के।

पहलो मुद्राकन स्किम का आविष्कार “प्रूफ ऑफ वर्क” स्किम के तौर पर हुआ था जो की एस.एच.ए-256 और कुछ स्क्रिप्ट पर बना था। “प्रूफ ऑफ स्टेक” एक सुरक्षा का ऐसा तरीका है जिसका प्रयोग क्रिप्टोकरेंसी नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए भी किया जाता है। यह “प्रूफ ऑफ वर्क” सिस्टम से अलग है और यह बहुत ही मुश्किल हैशिंग तरीको पर कार्य करता है जिससे ऑनलाईन ट्रांजिक्शन की वैधता बनी रहे और ट्रांजिक्शन सुरक्षित रहे। यह सिर्फ कोइन्स पर ही निर्भर रहती है।

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3.माईनिंग:
क्रिप्टोकरेंसी में माईनिंग एक ट्रांजिक्शन की एक वैधता है। माइनर्स क्रिप्टोकरेंसी की माईनिंग करते है और और इनाम के तौर पर उन्हें कुछ क्रिप्टोकरेंसी मिल जाती है । इनाम में मिले करेंसी की ट्रांजिक्शन चार्जेज बहुत कम लगती हैं क्योंकि यही उनके नेटवर्क को बढ़ते है माइनिंग के लिए एक सस्ती और टिकाऊ मशीन खरीदने की प्रतियोगिता बिटकॉइन के बनने से पहले ही शुरू हो गयी थी।

4.जी.पी.यू की कीमतों का बढ़ना:
क्रिप्टोकरेंसी के माईनिंग बढ़ने से ग्राफिक कार्ड्स की मांग भी ज्यादा बढ़ गयी । क्रिप्टोकरेंसी के लिए सबसे अच्छी ग्राफ़िक Nvidia,GTx 1060 और GTx 1070 है और AMD Rxt570,Rx580 ग्राफ़िक कार्ड के तो मूल्य में भी वृद्धि हो गयी। GTx 1070 जो की पहले 450 डॉलर का था वो अब 1100 डॉलर के मूल्य के हिसाब से बिक रहे थे।एक और फेमस ग्राफ़िक कार्ड्स GTx 1060 मॉडल जो की 250 डॉलर में आया करता था वो अब करीब 500 डॉलर के रेट तक आता है। Rx 570 और Rx 580 में जो AMD के ग्राफ़िक कार्ड है वो 1 साल के लिए तो आउट ऑफ स्टॉक हो गए थे। जब भी कोई नई ग्राफिक कार्ड बाजार में आते थे तो माइनर्स हमेशा उसे खरीद लेते थे।

5.वालेट्स:
एक क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट स्टोर जिसका प्रयोग क्रिप्टोकरेंसी को भेजने और पाने के लिए किया जाता था। इसका उपयोग करने के लिए दोनो पार्टियों के बीच एक “पब्लिक कीय” जेनरेट होता था जिससे कई वॉलेट में बिटकोइन्स भेज सकते थे।

6.ट्रांजिक्शन फीस:
यह मुख्यत लोगो के जरूरतों पर टिका हुआ था। करेंसी होल्डर कोई भी ट्रांजिक्शन चार्जेज को चुन सकता था। चार्जेज कितना होगा वह भेजने वाले के अमाउंट पर निर्भर करता था। ज्यादातर तो यह डॉलर 0.017 से डॉलर 0.055 तक ही था।

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7.एटॉमिक स्वैप :
यह एक इस मशीन है जहां एक क्रिप्टोकरेंसी दूसरी क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित हो जाती है और इसमे कोई तीसरी पार्टी की भी जरूरत नही पड़ती है।

8.ए.टी.एम:
जॉर्डन क्लोय, रोबोकॉइन के संस्थापक ने पहला बिटकोइन्स ए.टी.म यूनाइटेड स्टेट में 20 फरबरी 2014 को बनाया। “कीओस्क” ऑस्टिन में इनस्टॉल हुआ। टैक्स तो बैंक ए.टी.म के समान ही थे परंतु स्कैनर पहले कोई सरकारों पहचान जैसे ड्राइंग लाइसेंस या पासपोर्ट माँगता है जिससे यूजर की पहचान हो सके।

क्रिप्टोकरेंसी के प्रयोग:

1. वस्तुओ एवम सेवाओ को खरीदना:
क्रिप्टोकरेंसी के आने से इसकी मुद्रा की वैल्यू बढ़ गयी थी और ज्यातर निजी कंपनियां इसमे इन्वेस्ट करने लगी और कई जगह तो क्रिप्टोकरेंसी से भी कई समान खरीद सकते कोई भी ऑनलाइन सर्विसेज से इन कर्रेंसी के द्वारा सामान खरीद सकता है।

2.मनी ट्रांसफर:
क्रिप्टोकरेंसी के कई देशो में प्रचलन के कारण मनी ट्रांसफर अब और भी आसान हो गया है और कई लोग तो सरकारी मनी के बदले क्रिप्टोकरेंसी भी एक्सेप्ट करते है जो इनके फ्लो को भी बढ़ता है।

3.इन्वेस्टमेंट ओप्पोर्चुनिटी:

क्क्रिप्टोकरेंसी के इतने चलन के कारण और इसके लिमिटिड कर्रेंसी होंने के कारण इसके हर करेंसी का प्राइस बढ़ता जा रहा है। जिससे इसमे इन्वेस्ट करना एक तरफ से फायदा है।

क्रिप्टोकरेंसी के नुकसान:

1.शिकायत का कोइ संस्थान नही है:
अगर क्रिप्टोकरेंसी के ट्रांजिक्शन के समय कोई भी समस्या आती है या फिर इसके प्रयोग में कोई समस्या आती है तो इसके कोइ सरकारी संस्थान न होने के कारण यह एक आशिथिल हो गयी है।

2. कम जगहों पर इसको लेने वाले:
यह एक ऐसी असरकारी मुद्रा है जिसका प्रयोग पैसो के आम लेनदेन के लिए होता है पर यह नया होने के कारण इसको कई जगह पर नही लिया जाता है।

क्रिप्टोकरेंसी के फायदे(Benefits of crypto-currency):

1. मनी की सुरक्षा :

क्रिप्टोकरेंसी में सबसे ज्यादा सुरक्षा ही महत्वपूर्ण है। एक वर्तुल करेंसी होने के कारण इसकी सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल उठता है पर इसके अल्गोरिथम अच्छी होने के कारण यह करेंसी पूर्णतः सुरक्षित है और ट्रांजिक्शन के समय दोनो पार्टीयो के बीच एक निजी कीय भी जेनरेट होती है जिससे यह सिस्टम और बहु सुरक्षित हो जाता है।

2.अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैसो का एक ही लेनदेन:
आज के युग में डॉलर होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका प्रभुत्व है। परतु क्रिप्टोकरेंसी भी डॉलर के मुकाबले एक कॉम्पटीटर के रूप में उभर रहा है ।कई देशो में लेनदेन के लिए क्रिप्टोकरेंसी का भी प्रयोग हो रहा है।

3.झूठे वेदो से दूर :
अगर आप क्रिप्टोकरेंसी के माइनर भी है तो,यह कोई गारंटी नहीं होती है की आप किसी निश्चित अमाउंट तक करेंसी की माइनिंग कर सकते है| क्या आप 50 मिलियन क्रिप्टोकरेंसी ले सकते है ?

ओफ्फिएल करेंसी नोट सेंट्रल बैंक के द्वारा प्रिंट किये जा सकते है | बहुत से क्रिप्टोकरेंसी भी उत्पादित की जा सकती है परन्तु ब्लॉकचैन सिस्टम को इस तरह से बनाया गया है की इससे सिर्फ 21 मिलियन क्रिप्टोक्रेनी ही उत्पादित की जा सकती है | माना जा रहा है की 2024 तक यह वैल्यू पूरी हो जाएगी |

THANK YOU…

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