INDIA: DIPLOMATIC RELATIONS AND C.A.A IN INTERNATIONAL POLITICS

INDIA: DIPLOMATIC RELATIONS AND C.A.A IN INTERNATIONAL POLITICS & INDIA AS NEW CHAPTER HEREWITH C.AA. AND N.R.C :-

प्रधानमंत्री नरेंद्र-मोदी के आरम्भिक कार्यकालों में विदेश-नीति सबसे पहली प्राथमिकता थी। सयुक्त राज्य अमेरिका ने नरेंद्र-मोदी के साथ जो बर्ताब किया(अमेरिका दवारा मोदी का वीसा करीब करीब दस सालो के लिए रद्द कर दिया था ,और उनके दवारा गुजरात में किये कार्यो के आलोचना के बाद। ) अगर उसे छोड़ दे तो इन सबके बाद भी इंडो-पेसिफिक नीति के उदय से दोनों देशो में एक नए सम्बन्धो की शुरुआत हुई है। चीन के साथ भी, घरेलु भावनाओ के बाद भी प्रेजिडेंट क्सी-जिंपिंग का भारत में स्वागत किया गया,कुछ अनौपचारिक दौरे भी हुए(Mamallapuram Modi Xi Meeting) और इसी के साथ चीन का दौरा भी किया गया। आखिरकार दूरसे पड़ोसी देशो के साथ भी नई शुरुआत की गयी। मोदी सरकार ने परम्परिक रूप की नीतियों से घरेलु मामलो के लिए द्विपक्षीय सम्बन्ध बनाने की शुरुआत पाकिस्तान,बांग्लदेश,तथा श्री-लंका के साथ भी की। पुराने कार्यकालों उद्देशय और इस दूसरे नए कार्यकालों के मुख्य उदेश्यो के बारे में ज्यादा नहीं बताया गया। बजाय इसके :- द्विपक्षीय सम्बन्ध,
विदेश मंत्रालय और इसके विदेशी मिशन जोकि अब पूर्ण रूप से समर्पित है। आर्टिकल 370 के संविधान में संसोधन से,नागरिकता सांसोधन एक्ट और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के प्रस्ताव के बारे में कई देशो में और कई अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों ने भिन्न-भिन्न तरह के सवाल उठाये है।

INDIA’S RELATION WITH U.S AND EUROPEAN UNION:-

इस प्रकार के नीतियों से भारत और अमेरिका के सम्बन्ध पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ेगा जहाँ द्विपक्षीय पार्टी इंडिया को दो दशकों से सहयोग कर रही है। हलाकि डेमोक्रैट पार्टी का सहयोग HOWDY MODI जिसका आयोजन सितम्बर 2019 में हुआ था,के दौरान दूर हो जाना, जहाँ डेमोक्रेटिक पार्टी के तीन दर्जन में से सिर्फ दो दर्जन कानून बनाने वालो का होना, वह भी मिस्टर ओबामा के अधीन जो मोदी सरकार के बड़े समर्थक रह चुके है। जब यह एक प्रकार का काल्पनिक कारन था की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रमप के साथ स्टेज शेयर ना करने दिया जाना तथा पांच में से सिर्फ एक भारतीय-अमेरिकी कानून बनाए वालो का होना भी एक मत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।और यह परेशानी वाशिंगटन में विपक्ष में ही नहीं रहा है।

INDIA: DIPLOMATIC RELATIONS AND C.A.A IN INTERNATIONAL POLITICS
INDIA: DIPLOMATIC RELATIONS AND C.A.A IN INTERNATIONAL POLITICS

HOWDY MODI आयोजन को फॉलो करने वाले, राज्जीय विभाग, दूसरे द्विपक्षीय कमेटी ने अपने एक बयान जारी करते हुए चिंता जताई है ,कश्मीर में अभी भी नजरबंदी और नागरिकता संसोधन एक्ट में भी नजरबंदी।
सामान रूप से यही मुद्दा की आवाज़ यू.के पार्लियामेंट में उठ रही है। पिछले सितबर को यूरोपियन पार्लियामेंट में कश्मीर के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। और यह (कश्मीर मुद्दा) एक प्रकार से यू. के की राजनीती में भी चर्चित हुआ है। कश्मीर यू.के में लेबर और कन्सेर्वटिव पार्टी के बीच एक चुनावी अभियान के रूप में उभरी। मोदी सरकार का कश्मीर के लिए यूरोपियन पार्लियामेंट से कुछ दक्षिणपंथी लोगो को निमंत्रण देना।

ALSO READ : Views Of Bollywood Celebrities About C.A.A, NRC, NPR

INDIA’S TIES WITH BANGLADESH SLOWDOWN:-

सरकार अपने पडोसी देशो(दोस्तों और दुशमन) के नागरिकता संसोधन एक्ट के राय जानकर काफी दुखी तो है। पाकिस्तान जो हमेसा से ही गुस्से में रहता है व्ही अफ़ग़निस्तांन ने अभी तक कुछ भी नहीं बोला है परन्तु असली नुकशान तो बांग्लादेश के साथ सम्बन्ध बनाने में हुआ है। पिछले दशक, खासकर लैंड बॉउंड्री एग्रीमेंट के पुरे होने के बाद,ढाँका और नई दिल्ली दोनों ने काफी मजबूती से नए सम्बन्ध बनाए पर काम कर रहे थे जैसे नए व्यापारों के रास्तो का निर्माण, नए ऊर्जा के रास्ते,यात्रा करने के लिए लिंक विकसित करना इत्यादि। इन सम्बन्धो को पूर्वर्ती सालो में जीते हुए रूप में देखा जा रहा था जब आतंकवाद से और बॉर्डर पर हत्या से बचाव में सुरक्षा मिल रही थी। बांग्लादेश,अफगानिस्तान और पाकिस्तान को एक साथ और उनके अल्पसंखयको को धर्म पर आधारित नागरिकता से,इनके साथ संबध में कड़वाहट शामिल हो रही है। और इससे भारत के सम्बन्धो पर बुरा असर भी पड़ेगा। शेख हसीना सरकार ने यह पॉइंट-आउट किया है की मोदी सरकार सिर्फ एक समूह को छोड़कर बाकिओ के बारे में जयादा तवज्जो देना एक प्रकार से सम्प्रद्यिकता पर आधारित मुद्दा हो जाता है। अगर मोदी सरकार को संप्रदाय के आधार पर नागरिकता देनी है तो वे रोहिंग्या को क्यों नहीं नागरिकता प्रदान कर रही है।अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कई देश है जो एक जुट होकर इसके विरोध में खड़े हो रहे है अगर भारत का निकट साथी बांग्लादेश इसके साथ हो तो यह सिर्फ वक्त की बात होगी। बांग्लादेश के विदेश मंत्री ए.के अब्दुल मोमिन ने नागरिकता संसोधन एक्ट पर असहमति जताते हुए बताया है की:- यह भारत के पंथनिरपेक्ष ढांचों को नुकशान पहुचायेगा इस बात को ख़ारिज कर दिया की बांग्लादेश में अलपसंखयक को किसी भी प्रकार से प्रताड़ित नहीं किया जा रहा है। भारत हमेशा से ही एक सहिष्णु देश रहा है जो पंथनिरपेक्ष में विश्वास करता है।

ALSO READ: India: the inadequate economy is a cyclical phenomenon?

INTERNATIONAL RESOLUTIONS AND STATEMENTS:-

पहला, सभी प्रकार के बयान और रेसोलुशन खाली सिर्फ भाषण कला नहीं है और यह सब आगे चिंताजनक कदम भी बन सकते है। यू.एस कमिशन फॉर इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम U.S COMMISSION FOR INTERNATIONAL RELIGIOUS FREEDOM(USCIRF) ने पहले ही अमित शाह और दूसरे अधिकारियो पर कुछ प्रतिबन्ध लगाए है। जहाँ पर यह एक अत्यंत दुखद कदम है व्ही पर हसने की बात भी है। यह व्ही USCIRF है जो मोदी पर वीजा प्रतिबन्ध लगायी थी जब वे 2005 में गुजरात के मुखयमंत्री थे। इसी प्रकार यु.एस कांग्रेस के कानून बनाने वालो ने भी एक डिफेंस सेल्स पर प्रभावी ब्लॉक किया है। रूसिया से S-400 खरीदने पर भी अमेरिका का रोक था। अब अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और उससे जुड़े संगठन शायद ही

INDIA: DIPLOMATIC RELATIONS AND C.A.A IN INTERNATIONAL POLITICS
INDIA: DIPLOMATIC RELATIONS AND C.A.A IN INTERNATIONAL POLITICS

इंडिया को एक प्रकार का मंच प्रदान कर पाएंगे। भारत अब जो भी विदेसी नीति ला रहा है उससे सिर्फ सम्बन्धो में गिरावट आ रही है। कई लीडर ने तो अपनी यात्रा ही रद्द कर दी जैसे :- वर्तमान का उदाहरण जापान प्राइम मिनिस्टर शिंजो आबे या बांग्लादेश के फ़ौरन और होम मिनिस्टर। हलाकि ऐसा भी नहीं है की भारत की स्तिथि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गिर गयी है। अभी भी भारत ऐसा देश बना हुआ है जो देश में एक बहुध्रुवीय शक्ति के रूप में उभर रहा है. भारत का अंतरिक्ष में मिशन गगणयान,चंद्रयान-3 इत्यादि है जो भारत के भौतिक विकाश में मदद करता है. हाल ही में चार पाइलेट्स जो की भारतीय वायु सेना के है वो रूस के निकल चुके है ताकि वह गगणयान के लिए प्रशिक्षण ले सके। यह 2022 में होने वाला मिशन है। हर सरकार की कुछ ना कुछ कमिया और लाभ होते है उनके लिए गए फैसले ही देश का भविष्य तय करते है। वर्तमान सरकार के दवारा लायी गयी नीतियो ने भारत में तो काफी शोर मचा रखा है। नागरिकता संसोधन कानून के जिस तरीके से आने से विवाद हुआ है इस कानून के कुछ नियम से तो संविधान की मूल ढांचा को चोट पंहुचा है। अंत में सिर्फ इतना है की, सरकार को अपने किये हुए कार्यो के अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव के बारे में सोचना होगा और यह भी सोचना होगा की इससे भारत के घरेलु एक्शन पर कितना प्रभाव पड़ता है। यह भारत एक ख्याति प्राप्त देश है जिसमे पंथनिर्पेक्ष्ता,लोकतंत्र,स्थिर शक्ति,द्विपक्षीय लेन देन वर्तमान में,और जो निपुणता है भविष्य को सभालने में ,खासकर आर्थिक और जियो पॉलिटिक्स रूप में। इन सभी के बाबजूद भारत अपने विकास की तरफ बढ़ रहा है।

THANK YOU…

One thought on “INDIA: DIPLOMATIC RELATIONS AND C.A.A IN INTERNATIONAL POLITICS

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *