India: the inadequate economy is a cyclical phenomenon?

India: the inadequate economy is a cyclical phenomenon OR Structural?


क्या महीनो के चक्रीय-घटना के कारण या क्या अर्थव्यवथा के ढाचो की संरचनात्मक अवस्था की कमिया बढ़ रही है ?

Story so far : इस साल के 30 नवंबर को भारतीय सांख्यिकीय मशीनरी ने तिमाही विकास “जुलाई से सितम्बर” तक के डाटा प्रकाशित किये जिसमे बताया गया की जी.डी.पी 4.5% पर गिर के आ गयी है। भारत के इतिहास में यह छह महीनो में सबसे निचा रिकॉर्ड रहा है और पुरे आने वाले 10 सालो में यह 6.1%(जी.डी.पी और मुद्रास्फीति) नॉमिनल ग्रोथ रहा है। अगर पिछले तिमाही ग्रोथ से इसकी तुलना करे तब यह 5% था लेकिन 4.5% एक नाटकीय रूप से नहीं बना बल्कि 2018 के रिकॉर्ड किये गए मजबूत 8.1% में धीरे धीरे किये गए सरकारी नीतियों में बदलाव के कारण यह हर छह मीनो में तेज़ गति दे गिरा है। अगर इस साल के वित्तीय वर्ष की तुलना की जाये तो जी.डी.पी जहाँ 7.5% 2018-2019 में थी वहां अब 4.8% हो गयी है। फिक्स्ड-इन्वेस्टमेंट में 1% गिरावट आ गई है व्ही इस वर्ष निजी उपभोग आधी हो गयी है।

India: the inadequate economy is a cyclical phenomenon OR Structural?
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HOW THESE NUMBERS CAN HELP TO RECOVER THE INADEQUATE ECONOMY :

इस तिमाही वर्ष के पहले के दो महीनो में जो भी अर्थव्यवथा में वृद्धि/गिरावट के जो चिन्ह है वो सुधार के अच्छे भविष्य के बारे में नहीं बता सकते है। ऑक्टूबर में औधोगिक क्षेत्र में 3.8% की गिरावट आयी और दूसरी गिरावट जो सितम्बर में 4.3% मापी गयी थी। विनिर्माण क्षेत्र में ऑक्टूबर से ही गिरावट देखी जा सकती है। पर सबसे जयादा गिरावट 12.2% की दर से एलेक्ट्रीसिटी क्षेत्र में देखि जा सकती है(दूसरे वर्ष भी यह गिरावट की दर सामान ही थी) ! सिर्फ औद्योगिक क्षेत्र में ही नहीं बल्कि अर्थवव्था के दवारा किये गए एक अच्छा आकलन भी है। औपचारिक संख्याकी डाटा में आयत,मर्चेंडाइस निर्यात,ऑटोमोबाइल सेल्स,बैंक के दवारा दिए गए आंकड़े और भी कई आकड़े जो अर्थव्यवथा के मानदंड में देखे जा सकता है उन सभी की हालत बुरी है। नवंबर महीनो के आकड़े के मुताबिक, जी.एस.टी के कलेक्शन में 1,03,000 करोड़ रूपये एकत्रित किये गए जो की नकारात्मक वृद्धि में 6% की सीधी विकास को दर्शता है। अगर ऐसे ही चलता रहा तो देखा जायेगा की बैंक क्रेडिट ग्रोथ 58 सालो में सबसे काम रहेगा। इस कार्मिक गिरावट के बीच में जो डेर(एक साल छेह महीने) से चल रहा है,अर्थवव्था की स्तिथि सुधारने में, मुद्रास्फीति भी शुरू हो गयी है।

  • खुदरा और फुकर बिक्री(retail) की मुद्रास्फीति में यह केस नहीं है जो की नवंबर में 40 महीनो में 5.54% की वृद्धि दिखाई जो की इस साल में रिकॉर्ड की गयी वृद्धि से दो-गुना जयादा थी मुद्रास्फीति के मामले में।
  • खाद्य सेक्टर में मुद्रास्फीति ने 10% की वृद्धि की है। यह दिखता है की अब भारत मुद्रास्फीति-मंदी की और बढ़ रहा है जहाँ विकास और नौकरियों की स्तिथि में कमी है पर मुद्रास्फीति बढ़ती जा रही है !
  • पालिसी-मेकर्स के लिए इस स्तिथि से बहार निकलने में काफी परेशानी का समना करना पड़ सकता है। इस स्तिथि में Reserve bank of India के पास यह विकल्प है की वह interest rate में कमी कर सकती है। अगली आने वाली तिमाही ग्रोथ 28 फरबरी को प्रकाशित होगी। कई हफ्तों बाद निर्मला सीतारमण दूसरे यूनियन बजट को पेश करेंगी।
WHY FORMER CHIEF ECONOMIC ADVISOR WORK SAID: INDIA’S ECONOMY IS SUFFERING FROM CYCLICAL AND STRUCTURAL INFIRMITY :
India: the inadequate economy is a cyclical phenomenon OR Structural?
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मालूम होता है की अर्थवयवस्था में अचानक से कमी/गिरावट आनी शुरू हो गयी है। यह बात अरविन्द सुब्रमण्यम ने अपने इक नए पेपर वर्क में बताया है। यह एक साधारण गिरावट नहीं है। यह भारत की सबसे बड़ी गिरावट है जहाँ इकॉनमी को बड़े अधिकारीऔ दवारा नियंत्रित किया जा रहा है। अगर इस वित्तीय वर्ष के पिछले साथ महीनो को पुराने वित्तीय वर्ष से तुलना की जाये तो भारत को 1991 के इकनोमिक क्राइसिस की स्तिथि जैसा सामना करना पड़ सकता है। जो उदारीकरण वर्ष की याद दिलाता है। जब हम इस प्रकार के गिरावट की बात करते है तो,कई लोगो का कहना है की यह इकॉनमी की अवस्था इकनोमिक-ढांचा में महत्वपूर्ण कमी का आभाव दिखता है। बाकि कई लोगो का कहना है जिसमे सरकार भी शामिल है की यह चक्रीय-परिवर्तन भी जीवन-चक्र की तरह गुज़र जायेगा। जो भी ऊपर जाता है वः कभी न कभी निचे जरूर आता है। विश्व बैंक का कहना है की यह चक्रीय-गिरावट काफी गंभीर है। तर्क है की इस प्रकार के गिरावट का कारण मांग में कमी के वजह से है जो की ग्रामीण क्षेत्रों से उठ रही है।
अरविन्द सुब्रमण्यम और फेलमन रेकोनस के पेपर में बताया गया है : की आर्थिक गिरावट का कारण चक्रीय और सरचनात्मक कारक दोनों है। पर वित्तीयो में कमी की परेशानियों के कारण स्तिथि अब ख़राब हो चुकी है। हलाकि Demonetization and G.S.T भी कारण रहे है आर्थिक गिरावट में पर तेज़ी से गिर रही अर्थववस्था का कारण वर्तमान तिमाही है। इस संकट की शुरुआत 2008 के वैश्विक वित्तीय मंदी के बाद ही शुरू हो गयी थी। यह पेपर कारण बताते है की विकास की श्रृंखला जैसे तेल के कीमतों में कमी, नॉन-बैंकिंग फाइनेंसियल कारपोरेशन में तेज़ी से पैसा जमा होना जो की आंशिक रूप से डिमोटाइज़शन का रूप था, 2018 में L&FS के गिरावट होना।

पेपर का शीर्षक: INDIA’S GREAT SLOWDOWN: WHAT HAPPENED? WHAT’S THE WAY OUT?
अंडरलाइन: ALL MAJOR ENGINES OF GROWTH, THIS TIME ALSO INCLUDING CONSUMPTION.

भारत को इस संकट और शातिर रूप से भरे चक्रीय गिरावट से निकलने के लिए कुछ जल्दी ही करना पड़ेगा जहान पर बैलेंस शीट में मांगो कमी और बिगड़ती बैलेंस शीट में कमी विकास में गिरावट ला रही है।

WHAT ARE THE THOUGHTS OF RATING AGENCIES AND MULTILATERAL INSTITUTIONS ABOUT INDIA’S ECONOMIC SLOWDOWN :
  • अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पहले ही भारत के इस वर्ष की जी.डी.पी 6.1% बता दी है। पहले ऑक्टूबर से यह 7% थी पर देश के आर्थिक गिरावट को इसे छोटा कर दिया गया है। विश्व बैंक ने भी कहा है की भारत की अगले वर्ष की जी.डी.पी 6% होगी पर वो भी तब,जब भारत की अर्थववस्था में और भी गिरावट ना आये। और वह अपने दूसरे सत्र में वृद्धि करे।
  • सबसे स्पस्ट डाउन-ग्रेड रेटिंग जो इंडिया के बारे में आया था वो था”MOODY’S INVESTORS SERVICE” . जिन्होंने नवंबर में स्थिर से नकारात्मक रेटिंग दिया। एक हफ्ते बाद उन्होंने इस रेटिंग को 5.6% कर दिया (पहले 6%दिया था) और कहा की ये गिरावट लम्भी चलेगी।
  • कई एजेंसी जैसे : ASIAN DEVELOPMENT BANK, THE ORGANIZATION FOR ECONOMIC CORPORATION AND DEVELOPMENT, STANDARD & POOR ने भारतीय अर्थववस्था को 5.5% की रेटिंग दी जो की अपेह्ले बताया गया की 6.6% होगा। इस तरह की उदास करने वाली रेटिंग अभी भी आ रहा है।

HOW THE UNION BUDGET CAN HELP?

सरकार ने काफी तरह के नियम जो जुलाई 2019-20 में निवेशकों के लिए तय किये थे उनमे से काफी नियम वापिस ले लिए है। सितम्बर में : यहा तक की सरकार ने कॉर्पोरेट टैक्स में कई मत्वपूर्ण घटोतरी की है जिससे निवेशकों को लुभाया जा सके। वित्तीय मंत्री ने कुछ खास तरह के पैकेजो का अनावरण किया है वह भी सिर्फ औधोगिक क्षेत्र के लिए। जैसे की N.BFC और REAL STATE की स्तिथि सुधारने के लिए,जब चिन्हित हो रहा है की स्लोडाउन सरचनात्मक नहीं है। इसी तरह केंद्रीय बैंक ने भी अपने इंटरस्ट-रेट में कमी कर दी है और इससे प्रेरणा लेते हुए बोली लगाना इत्यादि में भी बृद्धि हुए है।

CONCLUSION :

जैसा की देखा जा रहा है की इस साल की जी.डी.पी कितनी निचे है और अगर आने वाले समय में इसमें सुधार नहीं हुआ तो हालत इससे भी बुरे हो सकते है. हलाकि इस बार की G.S.T का कलेक्शन भी काम था और सरकार इससे निपटने के लिए देखते है की अगले सत्र में क्या करती है।

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देश में चारो तरफ नागरिकता संसोधन कानून,राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर पर विरोध चल रहा है व्ही सरकार इससे सम्बंधित कुछ करने की बजाये करोरो रूपये खर्च करके डिटेंशन सेण्टर बना रहे है. हलाकि अभी इसकी जरुरत भी नहीं थी पर सरकार ने इस पर कुछ प्रतिक्रिया नहीं दे रही है।

Thank you…

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