Security Agencies In INDIA

Security Agencies: S.P.G, N.S.G And Z- PLUS Explained

एस.पी.जी कमांडो जो एक बेहद मुश्किल वक्त में हर परेशानी से टकरा जाते है। इनके आखो पर काले चश्मे,तेज़ नजरे वाले ये लोग देश में कई लोगो को सुरक्षा प्रदान करते है। मुश्किल स्तिथि में ये लोग अपने जान की परवाह न करते हुए लोगो को सुरक्षित करते है इनकी सुरक्षा दायरे में प्रधानमंत्री के साथ साथ कुछ ही महत्वपूर्ण व्यक्ति आते है। एस.पी.जी कमांडो देश में एक साहसी होने का प्रतीक है इनके द्वारा बनाया गया सुरक्षा के घेरे को तोड़ पाना बेहद ही मुश्किल काम है। जब से देश आज़ाद हुआ है तब से सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय बनी रही है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के हत्या के बाद तो देश में एक विशेष सुरक्षा एजेंसी की मांग बहुत जरुरी हो गयी थी। और 1985 में एस.पी.जी अस्तित्व में आया। एस.पी.जी के आलावा और दूसरे तरह के सुरक्षा एजेंसी देश में है जैसे जेड,जेड-प्लस,व्हाई और भी इत्यादि। जिनका काम देश के कई विशिस्ट और अति विशिस्ट वयक्ति को सुरक्षा दी जाती है। अपने काम को कुशल रूप से करने में एस.पी.जी ने काफी नाम कमाया है। वैसे यह इस बार इसलिए भी चर्चा में है क्युकी इस बार पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सरकार ने एस.पी.जी सुरक्षा वापिस ले ली गयी है। अब गृहमंत्रालय ने उन्हें केंद्रीय सुरक्षा बल का सुरक्षा कवर जेड प्लस देने का निर्णय लिया है। जेड प्लस केंद्रीय सुरक्षा सशस्त्र बल की और से देने वाले सबसे बड़े सुरक्षा में से एक है। मनमोहन सिंह दस सालो तक भारत में प्रधानमंत्री रहे है और अभी वह राज्यसभा के सांसद है। कई लोग एस.पी.जी का नाम सुनते आ रहे है इसका नाम सुनते ही लोगो के मन में विसिस्ट और अति-विशिस्ट लोगो का का ख्याल आता है और उनकी सुरक्षा में लगे उन लोगो का ख्याल आता है जो अपने काम में काफी तेज़ और हर बारीक़ से बारीक़ चीज़ो पर धयान देते है। एस.पी.जी सुरक्षा सिर्फ भारत के प्रधानमंत्री और पूर्व-प्रधानमंत्री को दी जाती है।

केंद्रीय सचिवालय के पूर्व अतिरिक्त सचिव जयदेव रानाडे के द्वारा कहा गया की मेरे ख्याल से जयादा इस बात पर धयान नहीं देना चाहिए की एस.पी.जी की पूर्व-प्रधानमंत्री से हटाई गयी है। बेसिक चीज़ यह है की प्रोटेक्शन तो है ही पर इसमें दो प्रशन सामने आते है जब एस.पी.जी अस्तित्व में लायी गयी थी तब वो प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए बनाई गयी थी उसके बाद धीरे-धीरे इसके दायरे में बढ़ाव होता रहा है। मेरे ख्याल से इसमें जो प्रोफेशनलिस्म है वो इसको मिलती है तो जिस कारण के लिए बनाया गया था जैसे कहते है लीन-मीन-फ़ोर्स तो उसके लिए यह बनाया गया था जो अब डायलुट हो गया है। जितने जयादा लोग आएंगे उतनी जयादा डिस्ट्रक्शन होगी और उतना जयादा एफर्ट करना पड़ेगा।

मनमोहन से ली जाने वाली सुरक्षा बहुत सी सुरक्षा एजेंसी के समीक्षा करने के बाद हुई है। एस.पी.जी की सुरक्षा वापस लेने की चर्चा केंद्रीय सचिवालय और गृहमंत्रालय के भिन्न तरह के खुफ़िआ एजेंसियों के मिली सुचना के आधार पर तीन महीने तक चर्चा करने के बाद फैसला लिया गया। गृहमंत्रालय ने बताया है की इनसे जुड़ी एजेंसिया समय समय पर समीक्षा करती है। मनमोहन सिंह को जेड प्लस सुरक्षा मिलती रहेगी। इस सुरक्षा के तहत मनमोहन सिंह के सुरक्षा में सी.आर.पी.अफ के कमांडो तैनात रहेंगे।

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केंद्रीय सचिवालय के पूर्व अतिरिक्त सचिव जयदेव रानाडे के द्वारा आगे कहा गया की एक असेसमेंट की जाती है तो गुप्त एजेंसी है जो गुप्त विभाग है भारत सरकार के वो एक खतरे का असेसमेंट करते है और फिर आगे फाइल गृहमंत्रालय और केंत्रिय सचिवालय को पुट-उप करते है की हमारा असेसमेंट यह है की आदमी को खतरा है या नहीं और कितना खतरा है उस बेसिस पर आगे सोचते है की आदमी को कौन-सी कैटगरी की सुरक्षा दी जाये। मनमोहन सिंह के एस.पी.जी के सुरक्षा हटाई गयी है उसके एक नियम थे की इतने दिन के लिए यह प्रोटेक्शन रहेगी और इसका कारण यह है उतने टाइम के लिए जो जानकारी है वो कर्रेंट रहेगी और उसके बाद वो आउटडेटिड रहेगी! एस.पी.जी एक कॉम्पैक्ट और एक प्रोफेशनल फ़ोर्स बनाई गयी थी .अब ऐसा लगता है की यह पेर्सनलिज़्ड हो गयी है कई लोग अब अपने ईगो के लिए भी इसका प्रयोग करते है।

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एस.पी.जी कानून 1988 के मुताबिक :


2014 में मनमोहन सिंह के हटने के बाद इन्हे एस.पी.जी के सुरक्षा एक साल तक रखने का अधिकार था। मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी को आ रहे खतरों के बाद सुरक्षा को वार्षिक तौर पर बढ़ाया गया था। मनमोहन सिंह की बेटी ने स्वेक्छा से एस.पी.जी सुरक्षा लेने से मना कर दिया था. अब एस.पी.जी पर हाल ही में चार लोगो को ही सुरक्षा प्रदान कर रही है। इसमें प्रधनमंत्री नरेंद्र-मोदी,कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी,राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी है। वैसे एस.पी.जी में अभी तक 3000 कमांडो है। इसमें नियुक्ति विभिन्न तरह के फोर्स के द्वारा होती है।

एस.पी.जी का गठन

देश में एस.पी.जी के अस्तित्व में आने से पहले प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस उपयुक्त के नेतृत्व वाली स्पेशल सिक्योरिटी के हाथो में है। ऑक्टूबर 1981 में इंटेलिजेंस ब्यूरो के कहने पर एक स्पेशल टास्क फ़ोर्स यानि एस टी अफ का गठन किया।
जिनका काम दिल्ली के अंडर और बाहर प्रधानमंत्री को सुरक्षा प्रदान करवाना था। अक्टूबर 1984 में प्राणमंत्री इंदिरा गाँधी के हत्या के बाद प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर काफी धयान दिया गया और इसपर चर्चा की गयी इसमें सचिवों की समिति ने काफी अहम भूमिका निभाई जिसमे यह सुझाव और निर्णयन पर पंहुचा गया की प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए एक स्पेशल ग्रुप बनाया जाये और इस प्रक्रिया के पालन हेतु एस.पी.जी का गठन किया गया।
एस.पी.जी ने 1985 से 1988 तक लेकर कार्यकारी आदेश के शक्ति के साथ काम किया फिर इसके बाद 1988 में संसद में एक अधिनियम के द्वारा इसे अधिनियमित किया गया।

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एस.पी.जी के खासियत

  • एस.पी.जी कमांडो F.N.S-2000 असॉल्ट राइफल से लैस होते है.
  • इसके अलावा कमांडो के पास ग्लोक 17 के नाम की मॉर्डर्न पिस्टल भी होती है।
  • कमांडो अपनी सुरक्षा के लिए एक बुलेट-प्रूफ जैकेट भी पहनते है।
  • कमांडो एक दूसरे से कम्यूनिकेट करने के लिए वाकी या इअर-प्लग का इस्तेमाल करते है।
  • एस.पी.जी कमांडो सुरक्षा के मद्य नज़र रखते हुए एल्बो और नी-पेड का इस्तेमाल करते है
  • ये कमांडो काला चश्मा लगते है ताकि किसी को पता न चले की वे कहाँ देख रहे है।
  • प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए सही तरह के लोग जैसे गाड़ी के ड्राइवर भी एस.पी.जी के होते है।
  • एस.पी.जी कमांडो का चुनाव सेना और पर-मिलिट्री फ़ोर्स से होती है।

एस.पी.जी एक्ट में संसोधन

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के हत्या के बाद इस एक्ट में 1991 में संसोधन किया गया और पूर्व प्रधानमंत्री और उनकी परिवार की सुरक्षा 10 सालो तक बढ़ा दी गयी।
इसके बाद साल 2002 में एस.पी.जी में संसोधन किया गया इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री को दी जाने वाली सुरक्षा के वर्षो को कम करके एक वर्ष कर दिया गया। और इसमें यह भी प्रावधान दिया गया की इसमें खतरे के समय इसकी अवधि बढ़ा दी जाये।

सुरक्षा एजेंसियों के दायरे

विसिस्ट और अति विसिस्ट लोगो को सरकार के द्वारा सुरक्षा मुहैया करवाई जाती है।
खतरे के आधार पर ही सुरक्षा प्रधान करवाई जाती है।
इसके अंतर्गत राष्ट्पति,प्रधानमंत्री,मुख्यमंत्री,केंद्रीय मंत्री ,सांसद,विधायक पार्षद,नौकरशाह,पूर्व-नौकरशाह,जज,पूर्व-जज,बिजनसमेन,क्रिकेटर फ़िल्मी कलाकार,साधु-संत या आम नागरिक भी हो सकते है.


सुरक्षा एजेंसियों के श्रेणी

भारत में सुरक्षा व्यवथा को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है जैसे:

  • जेड प्लस
  • जेड
  • वाई
  • एक्स

जेड प्लस और उनकी खासियत

एस.पी.जी सुरक्षा के बाद देश में जेड प्लस की सुरक्षा ही सबसे मजबूत है इसमें 55 सुरक्षा कर्मी होते है। और इसमें से 10 से जयादा एन.एस.जी कमांडो होते है और इसमें पुलिस ऑफिसर भी शामिल होते है।
इसमें पहले घेरे की जिम्मेदारी एन.एस.जी की होती है। और दूसरी लेयर में एस पी जी कमांडो होते है। इसके आलावा आई.टी.बी.पी और सी.आर.पी.एफ के जवान भी शामिल है।
इस सुरक्षा में एस्कॉर्ट्स और पायलट वाहन भी दी जाती है।


जेड श्रेणी और उनकी खासियत

जेड सुरक्षा में 22 जवान होते है इसमें 4 से 5 एन.एस.जी कमांडो और पुलिस अधिकारी भी शामिल होते है। इसको दिल्ली पुलिस या आई.टी.बी.पी और सी.आर.पी.एफ के द्वारा कवर किया जाता है। फ़िलहाल देश में 17 विसिस्ट लोगो को यह सेवा दी जा रही है।

वाई और एक्स श्रेणी और उनकी खासियत

यह 11 जवानो का एक सुरक्षा केंद्र होता है और इसमें 1 से 2 कमांडो और पुलिस भी शामिल होते है। और एक्स श्रेणी में सिर्फ 5 से 2 जवानो का सुरक्षा कवच होता है जिसमे सशक्त पुलिस अधिकारी शामिल होते है।

कैसे मिलती है सुरक्षा

सुरक्षा लेने वालो को संभावित सुरक्षा के बारे में बता कर सरकार को आवेदन देना पड़ता है और ये आवेदन व्यक्ति को अपने पास के पुलिस स्टेशन में करना पड़ता है। इसके बाद राज्य सरकार खतरों के जांच के लिए ख़ुफ़िया एजेंसी को केस सोपती है और रिपोर्ट मांगती है।
जब एक बार खतरे की जांच हो जाए तो राज्य में गृह-सचिव,महानिर्देशक,और मुख्य सचिव की श्रेणी यह तय करती ही की व्यक्ति को किस श्रेणी की सुरक्षा दी जाए।
इसके बाद औपचारिक रूप से इसकी रिपोर्ट केंद्रीय गृह-मत्रालयो को दिया जाता है। गृह सचिव की समिति वाली रिपोर्ट यह तय करती है की व्यक्ति को कितना खतरा है और उसे किस तरह का श्रेणी प्रधान किया जाये।
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