Views Of Bollywood Celebrities About C.A.A, NRC, NPR

Celebs who spoke out C.AA,NRC,NPR:जैसा जी देश में चल रहे नागरिकता संसोधन कानून और एन.पी.आर, एन.आर.सी के खिलाफ प्रोटेस्ट में कई फिल्म क्षेत्र के कलाकारों ने भी हिस्सा लिया और कई ने तो सोशल मीडिया के जरिये अपने विचार प्रस्तुत किये परन्तु इनमे से ऐसे कई लोग है जो खुलकर कर सामने आये है और इस प्रोटेस्ट में स्टूडेंट्स के साथ हिस्सा लिया है। इनमे से ऐसे तीन कलाकार है जिन्होंने प्रोटेस्ट में इस बारे में अपने विचार रखे।

स्वरा भास्कर(अभिनेत्री) के दवारा दिए गए विचार :

जो लोग कानून के रखवाले होते है उनका काम है कानून के व्यवस्था में रहकर काम करना न की अपना कुछ मन से बदला बना लेना,अपना एक काल्पनिक फिल्म बना लेना। यह एक भयाबह है। जो की उत्तर-प्रदेश में हो रहा है वो हर तरह से शॉकिंग(आशचर्यजनक) है और वो बिलकुल ही ऑन-एक्सेटबाल है। जिन लोगो का काम है सरकार चलाना और जिन लोगो का काम है कानून व्यवथा बनाये रखना व्ही कानून तोड़ रहे है।
रिपोर्टर: आप और आपकी टीम बहुत जगह गए है आपको किस तरह का हालत देखने को मिला?
स्वरा: नहीं में उत्तर-प्रदेश खुद नहीं गयी हूँ पर जो भी यू.पी से रिपॉर्ट आ रही है,सब लोग कह रहे है की बहुत ही डर की स्तिथि है। जिस किस्म के हमने वीडियो देखे है जिसमे पुलिस घरो में घुस के तोड़-फोड़ कर रही है,लोगो को पीट रही है,लोगो को पकड़ कर जेलों में ले जा रही है,आदमियों और औरतो ने कहा है की उन्हें मार पड़ रही है। वीडियोस देखे है जिनमे निहथे लोगो पर मार रहे है,गोलिया चला रहे है,गाड़िया तोड़ रहे है दुकानों पर हमला हो रहा है। ये क्या हो रहा है? ये पुलिस की हरकत है। अगर पुलिस और दंगाइयों में फर्क नहीं रह जायेगा तो यह किसी भी समाज के लिए अच्छा नहीं है। इस तरह की हिंसक घटनाये हो रही है मुझे लगता है की हर भारतीय को चिंतित होना चाहिए। क्युकी आज ये उत्तर-प्रदेश में हो रहा है कल ये हमारे साथ होगा।
रिपोर्टर: क्या आप अपील करना चाहती है?
स्वरा: हां में अपील करना चाहती हूँ न्याय तंत्र से। एक स्वतंत्र न्यायिक छान-बिन होनी चाहिए। ये कैसे हो सकता है की 19,20 लोगो की जाने चली गयी है। एक 8 साल का बच्चा मर गया है।
रिपोर्टर: जो हिंसा कर रहे है उनके लिए कोई अपील ?
स्वरा: हम निंदा करते है। हमें इसका विरोध करना चाहिए।

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नागरिकता संसोधन कानून पर अभिनेता जीशान के विचार:

अभी तो देश में सर्द माहौल है पर आप लोगो ने इसे गर्म कर दिया है। अभी तो सब परेशान हो रहे है इस बात से की स्टूडेंट्स ने क्या कर दिया है। और हम जैसे लोग खुश है। आप लोगो का प्रोटेस्ट एक सही दिशा में जा रहा है क्युकी अब जो सरकार इस स्तिथि को नियंत्रण में करने के लिए जो कुछ कर रही है वो इस बात की पुस्टी करता है। और ये लोग तभी घबराते है। उन्हें लगता है की हमारी मंशा किसी ने समझ ली। स्टूडेंट से इन्हे ख़ास परेशानी है तो अभी इनके लिए सबसे बड़े दिक्कत आप है। ये बीच बीच में अपनी नरेटिव बदल रहे है कभी ये हिन्दू मुसलमान बना रहे है। उसका कोई मतलब नहीं है इनकी मुख्य दिक्कत आप लोगो से है। मै पहले भी बोल चूका हूँ की इन लोगो की खास दुश्मनी होती है लाइब्रेरी से। ये लोग, कोई पढ़ता भी दिख जाता था तो मजाक उड़ाते थे अब ये लोग इन्हे मरते है। तो एजुकेशनल इंस्टिट्यूट से इन्हे बहुत दिक्कत होती है। क्युकी आदमी पढ़ गया तो वो सवाल उठाएगा और ये उन्हें बिलकुल पसंद नहीं है। इनको क्या पसंद है की आदमी आंख में पट्टी बांध कर आये और चलता रहे। ऐसा कभी दुनिया में हुआ है क्या की सरकार ने कोई कानून पास किया हो और उसके पक्ष में प्रोटेस्ट हो रहा हो। इसका मतलब समझ में आ रहा है,डर अंदर तक बेठ गया है। तो ये लड़ाई जो है वो हमे जारी रखनी है जीतेंगे हम ही। स्टूडेंट्स के पास जो ताकत होती है उसके सामने कोई भी शक्ति खड़ी नहीं हो सकती है। और इन लोगो को हमसे ज्यादा बेहतर पता है तभी तो ये लोग ऐसा कर रहे है। तो में ये बात ख़तम करूँगा। मेरे पास पाश शाहब की एक कविता है।


“मैं घास हूँ
मैं आपके हर किए-धरे पर उग आऊँगा

बम फेंक दो चाहे विश्‍वविद्यालय पर
बना दो होस्‍टल को मलबे का ढेर
सुहागा फिरा दो भले ही हमारी झोपड़ियों पर

मेरा क्‍या करोगे
मैं तो घास हूँ हर चीज़ पर उग आऊँगा

बंगे को ढेर कर दो
संगरूर मिटा डालो
धूल में मिला दो लुधियाना ज़िला
मेरी हरियाली अपना काम करेगी…
दो साल… दस साल बाद
सवारियाँ फिर किसी कंडक्‍टर से पूछेंगी
यह कौन-सी जगह है
मुझे बरनाला उतार देना
जहाँ हरे घास का जंगल है

मैं घास हूँ, मैं अपना काम करूँगा
मैं आपके हर किए-धरे पर उग आऊँगा ।

अरुंधति रॉय दवारा दिए गए विचार :

यू.पी में हमला हो रहा है मुश्ल्मानो पर, हम लोग साथ में लड़ रे है पर इन पर हमला हो रहा है। पुलिस घर-घर में घुस के तोड़-फोड़ कर रहे है। मझे डर है की जैसे मोदी 2002 में किये वैसे योगी उत्तर-प्रदेश में कर रहे है। तो जब जामिया में लाइब्रेरी पर हमला हुआ तो उस समय में केरला में थी और जब जवाहरलाल विशवविधालय के बच्चे प्रोटेस्ट करने पहुंचे तो उनमे 2006 का गुस्सा बाकि है फिर भी मुझे डर था की क्या होने वाला है। क्युकी हम लोग सब विल्लन है,टुकड़े-टुकड़े है या अर्बन-नक्शल है या जो कुछ भी है। जब दलित लड़ते है तो माओवादी बन जाते है,स्टूडेंट्स लड़ते है तो अर्बन-नक्शल बन जाते है। तो में देख रहे थी रात को की क्या हो रहा है आई.टी.औ पर और फिर जब मैने बाबा साहब का पोस्टर देखा,जब मैने जय भीम का नारा सुना तब में सो गयी। क्युकी हमे पता है की आज के ज़माने में हमें एक दूसरे को बचाना पड़ेगा। और जब हम एक दूसरे को प्रोटेक्ट करते है तो हम जो कहते है,हम बड़े बन जाते है। कुछ दिन पहले इस देश के प्रधानमंत्री ने रामलीला मैदान में जाकर लोगो के सामने बहुत बड़े झूठ बोला। मतलब उन्होंने बोले की हमारा सरकार ने एन.आर.सी के बारे में कुछ नहीं बोला। उनको पता था की एक मिनट में उनका अपना वीडियो निकलेगा।

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जब वो एन.आर.सी के बारे में वेस्ट-बंगाल के सन्दर्भ में बोल रहे थे की हमारे देश में डिटेंशन सेण्टर नहीं है ,उनको पता था की उसका फोटो है,उसका बजट है सब कुछ निकला हुआ है। लेकिन उन्होंने ऐसा झूठ क्यों बोला जबकि उनको पता था की एकदम पकड़ा जायेगा। इसीलिए बोला क्युकी गोदी मीडिया उनके पास है। हम लोग सब हसेंगे लेकिन ये मैया वालो ने एक घंटे का स्पीच ब्रॉडकास्ट किया तभी नहीं बोला की ये झूठ बोल रहा है। ये स्पीच वह पहुँच्या जहाँ इंटरनेट नहीं है जहाँ लोगो को पता नहीं है की क्या हो रहा है। तो ये वो सरकार है जिसको सबसे मजबूत किया है मीडिया ने। और मैन-स्ट्रीम मीडिया में हम लोग हँस रहे है वे वॉल रहे है की आप जहर नहीं फैलाइये,हम लोग मुश्ल्मानो के खिलाफ है। और सोशल-मीडिया में खुद ही जहर फैला रहे है। मैं आसाम गयी थी तो वह पर तो एन.आर.सी 1971 से है ना, तो लोग वहां पर अपने डाक्यूमेंट्स को अपने बच्चो से जयादा प्यार करते है,गाय से जयादा,खेत से जयादा। वहा गॉंव में जाओ तो जयादा भूख है,इतना काम पैसे है पर सबके पास प्लास्टिक बैग में अपना डॉक्यूमेंट रखा है। ब्रह्मपुत्र नहीं में बाढ़ आती है पर उन्हें ये पता है की बच्चो को मत बचाओ पर डाक्यूमेंट्स को बचाओ। इतना करने के बाद भी 19 लाख लोग एन.आर.सी से बहार है। उसमे से जयादातर मुशलमान नहीं है क्युकी उन्होंने डर के मारे अपना डाक्यूमेंट्स कलेक्ट किया है। बाकिओ ने सोचा कुछ नहीं होगा पर उनके पास कुछ नहीं है। उनके पास वकीलों को देने के लिए पैसा नहीं है।
तो ये जो कह रहे है की मुश्ल्मानो के खिलाफ है हां है पर ये गरीबो,आदिवासीओ,दलित के भी खिलाफ है और हम सबको एक उलझन में डालने का एक प्लान है। एक डिटेंशन सेण्टर बन रहा है आसाम में और एक डिटेंशन सेण्टर तीन-हज़ार लोगो के लिए,उसका बजट 45 करोड़। अब 19 लाख लोगो के लिए डिटेंशन सेण्टर बनाना है तो कितना करोड़ लगेगा?
तो पूरा इंडिया में ये काम करेंगे तो कितना करोड़ लगेगा। ये पूरा निजीकरण करके कोन सा कारपोरेशन के हाथ में जायेगा? ये सव सोचने की बात है। क्युकू हमे पता है की हमारे पुरे इकॉनमी को ख़तम कर दिया,Demonetization को लेकर के ख़तम कर दिया हमे। और इसके आवशयकता बता भी नहीं रहे है। ये वहां भी झूठ बोलते है। वहां भी संखयकी रूप से गलत है। जैसा की उनके खुद के इकनोमिक एडवाइज़र ने कहा की “India economy is in i.c.u”. अभी वो कंस्टीटूशन को ख़तम करने में लगे हुए है लेकिन इस टाइम में एन.पी.आर क्या है?
एन.पी.आर पहले भी हो चूका है। लेकिन एन.पी.आर ये है की वो आपके घर आएंगे कुछ नहीं पूछेंगे। आपका नाम क्या है,आपका फ़ोन नंबर क्या है,आपका आधार,लाइसेंस, कुछ भी दे दो। लेकिन एन.पी.आर, एन.आर.सी का डेटाबेस बनेगा। अब 10 राज्यों के चीफ मिनिस्टर ने बोला है की हम नहीं करेंगे। अभी सी.ए.ए के खिलाफ प्रोटेस्ट कर रहे है बाद में ये एन.पी.आर के दरवाजे से घुस रहे है ऐसे तो देश बचेगा ही नहीं। आर्थिक रूप से.सामाजिक रूप से.कानूनी रूप से नहीं बचेगा।

Thank you…

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