WHAT IS HYPERLOOP AND HOW IT WILL BE BENEFITED TO PEOPLE

WHAT IS HYPERLOOP AND HOW IT WILL BE BENEFITED TO PEOPLE

हाइपरलूप एक यातायात से संबंधित है ।यह एक केप्सुलरूपी चुम्बकीय ट्रैन है जो की बुलेट ट्रैन से 2 गुनी तेज़ रफ्तार से दौड़ेगी यह प्रतिघंटा 1000 से 1200 किलोमीटर के रफ्तार तक भी दौर सकती है ।अब भारत में इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है ।
हाइपरलूप प्रोजेक्ट “टेस्ला” के संस्थापक एलेन मस्क के दिमाग का एक विचार था पर उन्होंने वाइट पेपर पर हाइपरलूप का बेसिक डिज़ाइन बनाया और इसे दुनिया से सामने पेश किया। इस परिवहन का 5वा मोड़ भी बताया जा रहा है।
इसे मुंबई से पूणे तक की ट्रेन चलाने की तैयारी है। और इसे बनाने के लिए वर्जन हाइपरलूप 1 के साथ समझोता किया गया है।

WHAT IS HYPERLOOP AND HOW IT WILL BE BENEFITED TO PEOPLE
WHAT IS HYPERLOOP AND HOW IT WILL BE BENEFITED TO PEOPLE

इसके बनने के बाद क्या क्या चीज़े सम्भव हो सकेगी?
यह परियोजना बहुत ही जल्दी भारत में शुरू होने वाली है और जब यह शुरू हो जाएगा तब घंटो से सफर मिनट में पूरा हो सकेगा।
इसके बनने के बाद भारत रफ्तार के संबंध में दुनिया में काफी आगे बढ़ जाएगा।
यह तकनीक इसलिये दुनिया में फेमस है । दुसरे देशो में इस तकनीक को अपनाने के लिए तेज़ गति से काम हो रहा है ।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से अहमदाबाद में बुलेट ट्रैन के काम शुरू होने के बाद अब मुबई के लोगो को इससे भी अच्छी तकनीक मिल रही है । महाराष्ट्र सरकार ने पहले वर्जन हाइपरलूप 1 को मंजूरी दे दी है । इस ट्रैन का सबसे बड़ा फायदा ये होगा की, सड़क मार्ग के 3 घंटे के रास्तो को 23 मिंटो में मुम्बई से पूणे को जोड़ेगी।
भारत भविष्य में चीन,जापान,अमेरिका को पीछे छोड़ देगा।और ये हाइपरलूप तकनीक के जरिये ही संभव हो पायेगा। इस प्रोजेक्ट के प्रस्तावक हाइपरलूप टेक्नोलॉजी और दी.पी.वर्ल्ड “एफ.जेड.ई” के संयुक्त कांस्टीम(एक ऐसी संस्था जिसमे दो या दो से अधिक लोग एक काम के लिए कार्य करते है) है । जो इस प्रोजेक्ट को बनाने में काम करेगा।

  1. क्या है हाइपरलूप -प्रोजेक्ट (WHAT IS HYPERLOOP )
    एक अल्ट्रा -मॉर्डन तकनीक वाला सुपरफास्ट परिवहन(यातायात) तकनीक है।
    इसे मुम्बई से पुणे तक बनाया जा रहा है और इन दोनो शहरो के बीच की दूरी लगभग 200 किलोमीटर है।
    मुम्बई के बी.के.सी(बांद्रा कुर्ला काम्प्लेक्स)से वाकड स्टेशन तक चलेगी।
    करीब 117.8 किलोमीटर का सफर तय करेगी और यह ट्रैन 496 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ेगी।
    मुम्बई से पुणे के बीच की दूरी तय करने में 23 मिनट लेगी।और वैसे यह 3 घंटे का रास्ता हैं।
    प्रोजेक्ट को पूरा करने में 70 हज़ार करोड़ रुपये का निवेश किया है।और प्रोजेक्ट पूरा होने में 7 साल लगेंगे।
    पायलेट-प्रोजेक्ट
    पहले राउंड में इसे पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया जाएगा। और इसमे 5 हज़ार करोड़ रुपये की संभावना जताई जा रही है। अगर पहला फेज(राउंड) में अगर ये सफल होता है तो दूसरे फेज(राउंड) में इसे मुम्बई के बी.के.सी से वाकड़ स्टेशन तक चलाया जाएगा।

डॉक्टर जी.वी.आर राजू,सीनियर वाइस प्रेजिडेंट,एकोम इंडिया ने बताया की
“” हमने एक वैश्विक प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और प्रथम स्थान प्राप्त किया और चैन्नई और बेंगलुरू के बीच प्रस्ताव रखा क्योंकि दोनो शहरो में तेज़ी से डेवलोपमेन्ट हो रहा है।दूसरे राज्यो के मुकाबले महाराष्ट जल्दी टेक्नोलॉजी को अपनाने की कोशिश कर रहा है। और इसलिये वे पुणे और नवी मुम्बई ले बीच में इस्तेमाल करने के लिए कदम उठाये जा रहे है।””

हाइपरलूप प्रोजेक्ट
फायदा(HOW IT WILL BE BENEFITED TO PEOPLE)
मुम्बई से पुणे के बीच हर साल यात्रियों को संख्या 2 गुनी हो रही है ।टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार प्रतिदिन 25,000 से 30,000 तक यात्री यात्रा करते है।
यह संख्या हाइपरलूप यानी 7 साल बाद लागू होने के बाद करीब 75 मिलियन लोग मुबई से पुणे यात्रा करेंगे ।
ऐसे में हाइपरलूप के द्वारा 200 मिलियन लोगो को यात्रा करने में सुविधा मिलेगी।
हाइपरलूप वर्जन 1 हाईस्पीड ट्रैन के लिए देश में ऐसे ट्रेक का निर्माण करेगी जो इसके लिए अनुकूल हो तथा इसके बनने के बाद कम दूरी की हवाई यात्रा के विकल्प के रूप में यह हमेशा काम करेगा।
यह प्रणाली जीरो उत्सर्जन करेगी।
कंपनी का कहना है की यह 100% विधुत मार्ग होने के कारण 30 सालो में 86 हज़ार टन ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम कर सकता है।
इस तकनीक के जरिये यातायात प्रणाली में विकास के साथ साथ रोज़गार के अवसर बो बढ़ेंगे।
हाइपरलूप क्यों कहा जाता है ?
इसे हाइपरलूप इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस तकनीक में ट्रैन एक लूप के माध्यम से सफर तय करेगी ।जिसको स्पीड हवाई जहाज़ के बराबर या उससे भी तेज़ होगी।

WHAT IS HYPERLOOP AND HOW IT WILL BE BENEFITED TO PEOPLE
WHAT IS HYPERLOOP AND HOW IT WILL BE BENEFITED TO PEOPLE

  हाइपरलूप तकनीक
        खासियत
इसमे एक विशेष प्रकार का कैपशूल या पॉड्स का प्रयोग होगा।
इसे एक पारदर्शी पाइप के अंदर उच्च वेग से चलाया जाएगा और इसे ट्यूब ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी भी कहा जा सकता है।
इसमे बड़े बड़े पाइपों के अंडर वेक्यूम जैसा माहौल तैयार किया जाएगा जो की हवाओ की अनुपस्तिथि उत्पन्न करेगा।
इस परिवहन तकनीक में पॉड्स को जमीन के ऊपर बड़े बड़े पाइपों में इलेक्ट्रिकल चुम्बक पर चलाया जाएगा और चुम्बकीय प्रभाव से ये पॉड्स ट्रेक से कुछ ऊपर उठ जायेगे जिससे गति ज्यादा हो जाएगी और घर्षण कम ।
इन वाहनों के पहिये नही होते और ये खाली स्थान में तैरते हुए आगे बढ़ते है।
बिजली की खपत कम होगी और प्रदूषण भी कम होगा।
स्पेन में एक फुल साइज़ का पैसेंजर केप्सूल तैयार हो गया है और इस कैपशूल की लंबाई 105 फ़ीट और इसका वजन 5 टन है।
इस केप्सूल में 28 से 40 पैसेंजर बेठ सकेंगे और इसकी स्पीड 760 किलोमीटर प्रतिघन्टा होगी।
ट्रैफिक से भी छुट्कारा मिलेगा।
हाइपरलूप तकनीक चुनोतियाँ
1000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ चलने वालो वाहनों को आपातकाल में ब्रेक लगाना पड़ा तो क्या होगा?

क्या वाहनों को कही टर्न लेना पड़ा तो क्या वो ट्यूब के किनारे से टकराएंगे?
सुरंग के सक्रेपन की वजह से पॉड्स चौड़ाई कम होगी और लोगो को हिलने डुलने में परेशानी होगी।
आपातकाल और प्राकृतिक आपदा की स्थिति में सुरक्षा के क्या उपाय होंगे?
माना जा रहा है की 2021 तक दुनिया का पहला हाइपरलूप टेक्नोलॉजी बन जाएगा और इसमें दो कम्पनिया सबसे आगे है..
1. स्पेस-एक्स
2. हाइपरलूप 1
{देश में हाइपरलूप के आने से पहले पटरियो पर बुलेट ट्रैन दौड़ने लगेगी। अगर कोई ट्रैन 1 घण्टे में 300 किलोमीटर की दूरी तय कर लेती है तो बोलचाल की भाषा में बुलेट टैन कहीं जाती है।}
सिर्फ भारत ही नही बल्कि दुनिया के कई बहुत से देश है जहा इस हाइपरलूप ट्रैन को चलाने की तैयारी की जा रही है। बहुत से विकसित देश इस प्रणाली को अपनाने के लिए आगे आये है। अमेरिका,कैनेडा,सऊदी अरब और फ़्रांस समेत कई देशो में हाइपरलूप परियोजना अलग अलग ट्रायल के फेज से गुज़र रही है। वर्जन हाइपरलूप कम्पनी ने ‘कैलिफोर्निया’ में 500 मीटर हाइपरलूप ट्यूब बिछाई थी जिसने पैसेंजर पॉड्स को 386 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाया गया।
इस टेस्ट में मिली सफलता के बाद इसे दुनिया में काफी बढ़वा मिल रहा है। केलिफोर्निया के अलावा अमेरिका के मिसौरी,टेक्क्र्स,कोलिराडो इत्यादी शहरो में भी इस तकनीक पर काम चल रहा है।
सऊदी अरब में दुनिया का सबसे लंबा हाइपरलूप ट्रेक बनाया जाएगा। इसके लिए कम्पनी में जेद्दा के उत्तर में एक अनुशंधान और विकास केंद्र और हाइपरलूप निर्माण सुविधा बनाने के लिए सऊदी अरब के पास इकनोमिक सिटी प्राधिकरण के साथ एक अग्रीमेंट किया है। इसमे 35 किलोमीटर का ट्रेक परीक्षण शामिल है। वर्जिन हॉपरलूप कस दावा है को इस तकनीक से 10 घंटो का सफर सिर्फ 76 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। रूस,फिनलैंड,नीदरलैंड में भो हॉपरलूप तैयार हो रहा है|
पहला हाइपरलूप प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश में आया है जो विजयवाड़ा से अमरावती तक जायेगा और यही नहीं 57. 2 किलोमीटर की दूरी होने के बाबजूद यह सिर्फ 5 मिनट्स में डेस्टिनेशन तक पहुचायेगा | आंध्र प्रदेश आर्थिक विकास मंडल ने हाइपरलूप ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी के साथ इक मेमोरेंडम साइन किया है |

यह इतना जरूरी क्यों है ?
एक उभरती हुई दुनिया में तेज़,सस्ता, प्रयावरण को नुकसान न पहुंचाने वाला और एक ऐसा यातायात का साधन होना चाहिए काम में जयादा एफिसिएंट हो |
पुराने यातायात के साधन जैसे की सड़के,एयरपोर्ट,बस,में काफी भीड़भाड़ होने लगी है और हाइपरलूप इन सभी को चेलेंज कर रही है |
वर्जन हाइपरलोप 1 का कहना है की यह एक घंटे में करीब 16,000 पैसेंजर को बिठा कर यात्रा करवा सकती है |

निष्कर्ष

अगर देखा जाये तो हाइपरलूप के फयदे और नुकशान दोनों है जहाँ ये एक तरफ सभी लोगो का समय बचाएगी और लाइफ को जीने में और भी सुविधा मिलेगी व्वहीँ यह इतनी फ़ास्ट होने के कारण खतरनाक भी है अगर इसे कुछ सेक्शंस में बाटे तो पता चलता है की अभी शायद एक विकाशशील देशो में जरुरत नहीं है क्युकी विकसशील देशो में इसके आलावा भी कई काम है और इंडिया जैसे देशो में एक हाइपरलूप होना अच्छी बात है पर शायद अभी हमे अपने रेलवे पर जयादा धयान देना चाहिए | जहाँ बाढ़ की वजह से हर साल कई जगह पानी में चले जाते है और रेलमार्ग थप हो जाता है वहां अभी इस हाइपरलूप की जयादा जरुरुत नहीं है | देश में कई और सेक्टर है जिसमे सुधर करने की जरुरत है जैसे आर्थिक व्यवस्था ,कम्प्यूटर्स वर्ल्ड ,इत्यादि | हाइपरलूप के देश में आने से देश को काफी फायदा भी होगा पर इसकी जैसा की एलेन मास्क का मानना था की अभी इस टेक्नोलॉजी को बनाने में कितनी कॉस्ट आएगी और फिर लोगो के लिए टिकट का किराया सस्ता होगा या मेहगा ? इन सभी बातो का कोई भी जवाव नहीं है और स्टेशनो पर रुकेगी इत्यादि | परतु अगर इसे ओवरआल देखा जाये तो यह परिवहन के सम्बन्ध में सबसे अच्छी खोज है लोगो के लिए न सिर्फ रोज़गार बढ़ेगा बल्कि इसका नॉलेज भी लोगो को प्राप्त होगा |
THANK YOU…

NEXT AMAZIG ARTICLE

One thought on “WHAT IS HYPERLOOP AND HOW IT WILL BE BENEFITED TO PEOPLE

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *